NEET UG 2026: जबलपुर के आर्यमन सोलंकी बने मध्य प्रदेश टॉपर, AIR 46 के साथ रचा इतिहास

NEET UG 2026: जबलपुर के आर्यमन सोलंकी बने मध्य प्रदेश टॉपर, AIR 46 के साथ रचा इतिहास

जबलपुर: NEET UG 2026 के नतीजों में मध्य प्रदेश के जबलपुर के छात्र आर्यमन सोलंकी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 प्राप्त की और 696 अंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मध्य प्रदेश को गौरवान्वित किया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के लिए आर्यमन की सफलता प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

आर्यमन सोलंकी ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत, अनुशासित दिनचर्या और पढ़ाई के प्रति गहरी रुचि को दिया। उनका कहना है कि उन्होंने कभी भी पढ़ाई को बोझ नहीं समझा। वे हमेशा उन विषयों को पहले समझने की कोशिश करते थे जिनमें उनकी विशेष रुचि थी। इसी रणनीति ने उन्हें कठिन प्रतियोगी परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने में मदद की।

उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल रटने पर नहीं बल्कि अवधारणाओं (Concepts) को अच्छी तरह समझने पर रहा। यही कारण है कि परीक्षा के दौरान वे आत्मविश्वास के साथ सवालों का जवाब दे सके। आर्यमन का मानना है कि अगर किसी विषय को समझकर पढ़ा जाए तो सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

आर्यमन ने यह भी बताया कि पहले आयोजित हुई और बाद में रद्द कर दी गई परीक्षा में उन्हें करीब 710 अंक मिलने की उम्मीद थी। हालांकि दोबारा परीक्षा होने के बाद भी उन्होंने अपना आत्मविश्वास बनाए रखा और बेहतर प्रदर्शन करते हुए 696 अंक हासिल किए। उनका कहना है कि किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण होता है।

उनका अगला लक्ष्य देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल दिल्ली AIIMS में प्रवेश लेना है। आर्यमन भविष्य में न्यूरोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं और अपने पिता की तरह चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देना चाहते हैं। उनका मानना है कि डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है।

आर्यमन ऐसे परिवार से आते हैं जहां चिकित्सा क्षेत्र का मजबूत वातावरण रहा है। उनके पिता डॉ. फरिंद्र सिंह सोलंकी एक प्रतिष्ठित न्यूरोलॉजिस्ट हैं, जबकि उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) हैं। उनकी बड़ी बहन भी मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। ऐसे माहौल ने बचपन से ही उन्हें चिकित्सा क्षेत्र की ओर प्रेरित किया।

परिवार का कहना है कि आर्यमन शुरू से ही पढ़ाई में गंभीर और अनुशासित रहे हैं। उन्होंने नियमित अध्ययन, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच को अपनी सफलता का आधार बनाया। परिवार ने हमेशा उन्हें मानसिक रूप से प्रोत्साहित किया और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया।

NEET UG देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें हर वर्ष लाखों छात्र मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए भाग लेते हैं। ऐसे में ऑल इंडिया रैंक 46 हासिल करना बड़ी उपलब्धि माना जाता है। आर्यमन की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, निरंतर अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर कठिन से कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि विषयों की गहरी समझ, नियमित अभ्यास और मानसिक संतुलन भी सफलता के लिए बेहद जरूरी है। आर्यमन की तैयारी का तरीका दूसरे छात्रों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है।

आर्यमन ने मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों को सलाह दी कि वे दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी तैयारी पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि हर छात्र की सीखने की क्षमता अलग होती है, इसलिए अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम करना अधिक जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सकारात्मक सोच और लगातार मेहनत किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने की सबसे मजबूत कुंजी है।

उनकी इस शानदार उपलब्धि पर शिक्षकों, मित्रों, परिजनों और शुभचिंतकों ने खुशी जताई है। मध्य प्रदेश में शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भी उनकी सफलता की सराहना करते हुए इसे राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया है। अब सभी की नजरें उनके अगले सफर पर हैं, जहां वे दिल्ली AIIMS में प्रवेश लेकर अपने डॉक्टर बनने के सपने को साकार करना चाहते हैं।

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