राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच: SIT की जांच तेज, 100 से अधिक लोगों से पूछताछ

राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच: छह दिन की पड़ताल के बाद लखनऊ लौटी SIT, जल्द सौंप सकती है रिपोर्ट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच को लेकर उत्तर प्रदेश में हलचल तेज हो गई है। अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित तौर पर चढ़ावे में गड़बड़ी और चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) छह दिनों तक गहन पड़ताल करने के बाद लखनऊ लौट चुकी है। अब माना जा रहा है कि जांच टीम अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अगले सप्ताह राज्य सरकार को सौंप सकती है।

यह मामला सामने आने के बाद से ही प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की अनियमितता को गंभीरता से लिया जा रहा है। इसी वजह से राज्य सरकार ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने अयोध्या में अपने प्रवास के दौरान मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से व्यापक पूछताछ की। बताया जा रहा है कि अब तक 100 से अधिक लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें मंदिर ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी शामिल हैं, जिनसे चढ़ावे के प्रबंधन और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया को लेकर सवाल पूछे गए।

जांच का दायरा केवल नकद दान तक सीमित नहीं है। एसआईटी ने मंदिर में आने वाले सोने, चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के रिकॉर्ड की भी समीक्षा की है। टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई कीमती वस्तुओं का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाता है और उनके संरक्षण तथा लेखा-जोखा की व्यवस्था कितनी पारदर्शी है।

इसके अलावा, जांच टीम ने महाकुंभ 2025 के दौरान मंदिर को प्राप्त हुए दान और चढ़ावे के आंकड़ों का भी अध्ययन किया है। अधिकारियों का मानना है कि बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान चढ़ावे में अचानक बढ़ोतरी होती है, इसलिए उस अवधि के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण है। दान की मात्रा, उसके संग्रहण और उसके प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है।

एसआईटी ने कुछ संदिग्ध कर्मचारियों और उनके परिजनों की आर्थिक गतिविधियों की भी जांच शुरू की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हाल के वर्षों में उनके नाम या रिश्तेदारों के नाम पर कोई बड़ी संपत्ति खरीदी गई है या नहीं। बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारियों का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सभी दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान किया जा रहा है। इसके बाद ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्ट में जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और संभावित अनियमितताओं का उल्लेख किया जा सकता है।

राम मंदिर से जुड़ा यह मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जांच एजेंसियां हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

अब सभी की नजर एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। फिलहाल अयोध्या से लेकर लखनऊ तक इस मामले पर लगातार निगाह रखी जा रही है। अब सभी की नजर एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। फिलहाल अयोध्या से लेकर लखनऊ तक इस मामले पर लगातार निगाह रखी जा रही है।

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