Trump China Iran Missile Report: पाकिस्तान के रास्ते ईरान को चीन की मिसाइलें भेजे जाने की रिपोर्ट पर ट्रंप का बड़ा बयान
Trump China Iran Missile Report: पाकिस्तान के रास्ते ईरान को चीन की मिसाइलें भेजे जाने की रिपोर्ट पर ट्रंप का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा पाकिस्तान के रास्ते ईरान को मिसाइलें भेजे जाने की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि यह खबर सही साबित होती है तो यह बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली बात होगी।
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन द्वारा पाकिस्तान के रास्ते ईरान को हथियार भेजे जाने की मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यदि ऐसी खबरें सही साबित होती हैं तो यह बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली बात होगी। ट्रंप ने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा।
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से उन रिपोर्टों पर सवाल पूछा गया, जिनमें दावा किया गया है कि आने वाले कुछ सप्ताह में चीन में निर्मित लगभग 400 कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें पाकिस्तान के रास्ते ईरान पहुंच सकती हैं। इस पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस तरह की किसी भी गतिविधि की उम्मीद नहीं है और यदि ऐसा हुआ तो उन्हें गहरी निराशा होगी।
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह सच नहीं होगा। राष्ट्रपति शी ने मुझे भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार नहीं भेज रहा है। यदि रिपोर्ट सही हुई तो यह बहुत गंभीर मामला होगा।”
इससे पहले अमेरिकी मीडिया संस्थान CNN ने खुफिया एजेंसियों के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि चीन, ईरान की वायु रक्षा क्षमता मजबूत करने के लिए नए एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की तैयारी कर सकता है। रिपोर्ट में कहा गया कि हाल के क्षेत्रीय सैन्य तनाव के बाद ईरान अपने रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए सहयोगी देशों की मदद तलाश रहा है।
हालांकि CNN की रिपोर्ट में किए गए दावों की अमेरिकी प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिर भी इस खबर ने वॉशिंगटन, बीजिंग और तेहरान के बीच कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है।
ट्रंप ने बातचीत के दौरान यह भी याद दिलाया कि उन्होंने हाल ही में चीन और रूस दोनों को स्पष्ट संदेश दिया था कि वे ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता देने से बचें। उनके अनुसार, शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनके देश फिलहाल ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है और वह मध्य पूर्व में किसी भी ऐसे कदम को लेकर चिंतित है, जो क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ा सकता है।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर भी ट्रंप ने इस विषय पर टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार चीन और रूस ईरान को हथियार नहीं भेज रहे हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में ऐसा होता है तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं और यह संबंधित देशों के हित में भी नहीं होगा।
उनके इस बयान को अमेरिका की संभावित विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब मध्य पूर्व में ईरान की भूमिका को लेकर तनाव बना हुआ है।
यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका यह भी जांच कर रहा है कि क्या रूस और चीन के खुफिया नेटवर्क ने ईरान को अमेरिकी सैन्य गतिविधियों से जुड़ी कोई संवेदनशील जानकारी उपलब्ध कराई थी। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां कथित तौर पर इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों के दौरान किसी प्रकार की खुफिया जानकारी साझा की गई।
फिलहाल इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही चीन, पाकिस्तान या ईरान की ओर से इस संबंध में कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
रिपोर्टों में पाकिस्तान का नाम सामने आने से यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। यदि भविष्य में इस तरह के किसी हथियार ट्रांजिट की पुष्टि होती है, तो इसका असर अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों, चीन-पाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी और मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलें और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हथियार क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अमेरिका इस मामले को केवल एक मीडिया रिपोर्ट के रूप में नहीं, बल्कि संभावित भू-राजनीतिक चुनौती के रूप में भी देख रहा है।
फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियां इन रिपोर्टों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश करती हैं या नहीं। चीन और रूस के आश्वासनों के बावजूद ट्रंप का सार्वजनिक बयान यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन इस मुद्दे पर सतर्क बना हुआ है।
यदि आने वाले दिनों में इस मामले में कोई नई जानकारी सामने आती है, तो यह अमेरिका-चीन संबंधों, ईरान की रक्षा नीति और मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

