NCDC Amendment Bill: सहकारी क्षेत्र के लिए क्या है सरकार की नई योजना?

NCDC Amendment Bill: सहकारी क्षेत्र के लिए क्या है सरकार की नई योजना?

केंद्र सरकार सोमवार, 10 अगस्त को नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NCDC) अमेंडमेंट बिल, 2026 लोकसभा में पेश कर सकती है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य सहकारी क्षेत्र में फंडिंग और वित्तीय सहायता की व्यवस्था को ज्यादा लचीला और व्यापक बनाना है।

यदि यह बिल पारित हो जाता है, तो NCDC सिर्फ सहकारी समितियों के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सहकारी विकास से जुड़ी दूसरी संस्थाओं को भी सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा। इससे सहकारी क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और टेक्नोलॉजी परियोजनाओं के लिए फंडिंग के नए रास्ते खुल सकते हैं।


NCDC क्या है?

NCDC यानी नेशनल कोऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन सहकारिता मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना 1963 में NCDC Act, 1962 के तहत की गई थी।

फिलहाल NCDC मुख्य रूप से इन क्षेत्रों में काम करता है:

  • कृषि उपज का उत्पादन
  • खाद्य सामग्री का भंडारण
  • प्रोसेसिंग और मार्केटिंग
  • निर्यात और आयात से जुड़े कार्यक्रम
  • सहकारी समितियों को वित्तीय सहायता

अब सरकार इसके कामकाज के दायरे को और बढ़ाना चाहती है।


बिल पास हुआ तो क्या बदलेगा?

सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि NCDC की भूमिका केवल रजिस्टर्ड सहकारी समितियों तक सीमित नहीं रहेगी

प्रस्तावित संशोधन के अनुसार NCDC अब उन संस्थाओं को भी सीधे लोन और ग्रांट दे सकेगा, जो सहकारी क्षेत्र के विकास में काम कर रही हैं, भले ही वे खुद सहकारी सोसाइटी के रूप में पंजीकृत न हों।

हालांकि एक महत्वपूर्ण शर्त यह होगी कि मिलने वाली राशि का उपयोग सहकारी गतिविधियों और विकास कार्यक्रमों के लिए ही किया जाए।

सरकार का तर्क है कि आज सहकारी क्षेत्र में कई राज्य एजेंसियां, वैधानिक संस्थाएं और विशेषीकृत संगठन भी काम कर रहे हैं, जिन्हें मौजूदा कानून के तहत सीधे NCDC से वित्तीय सहायता मिलने में कठिनाई होती है।


क्या NCDC निवेश भी कर सकेगा?

हां। बिल में यह प्रस्ताव भी शामिल है कि NCDC को सहकारी संस्थाओं और सहकारी विकास से जुड़ी दूसरी संस्थाओं के शेयर कैपिटल में निवेश करने की अनुमति दी जाए।

इसके लिए केंद्र सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सहकारी समितियां आगे भी NCDC की मुख्य लाभार्थी रहेंगी और यह बदलाव केवल वित्तीय सहायता पहुंचाने के संस्थागत विकल्पों को बढ़ाने के लिए है।


और कौन-कौन से बदलाव प्रस्तावित हैं?

बिल में कुछ अन्य महत्वपूर्ण संशोधन भी शामिल हैं:

  • “फूडस्टफ्स” की परिभाषा का विस्तार – केंद्र सरकार भविष्य में अन्य खाद्य पदार्थों को भी अधिसूचित कर सकेगी।
  • इंडस्ट्रियल गुड्स से जुड़ी भौगोलिक पाबंदियों को हटाने का प्रस्ताव – इससे सहायता किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी।
  • NCDC को अपने कामकाज के लिए अतिरिक्त प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

सरकार अभी बदलाव क्यों चाहती है?

सरकार का कहना है कि जून 2021 में सहकारिता मंत्रालय के गठन के बाद सहकारी क्षेत्र का दायरा तेजी से बढ़ा है। अब इसमें केवल पारंपरिक सहकारी समितियां ही नहीं, बल्कि कई नई संस्थाएं और विकास मॉडल भी शामिल हो चुके हैं।

बिल के Statement of Objects and Reasons के अनुसार सहकारी क्षेत्र पहले की तुलना में अधिक विविध और बहु-आयामी हो चुका है। इसलिए NCDC को ऐसा कानूनी ढांचा देने की जरूरत महसूस की गई, जिससे वह बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से और सीधे वित्तीय सहायता उपलब्ध करा सके।


पहले भी हो चुके हैं संशोधन

NCDC Act में इससे पहले भी 1973, 1974 और 2002 में संशोधन किए जा चुके हैं। उन संशोधनों का उद्देश्य था:

  • फंड जुटाने के स्रोत बढ़ाना
  • गतिविधियों का दायरा बढ़ाना
  • सहकारी क्षेत्र को अधिक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना

अब 2026 का प्रस्तावित संशोधन NCDC को और अधिक आधुनिक और बहुउद्देश्यीय वित्तीय संस्था बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।


किसे हो सकता है फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बिल पारित होने पर इन क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है:

  • डेयरी और दुग्ध सहकारी संस्थाएं
  • कृषि प्रोसेसिंग यूनिट
  • वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज परियोजनाएं
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO) से जुड़ी संस्थाएं
  • ग्रामीण मार्केटिंग और सप्लाई चेन परियोजनाएं
  • सहकारी क्षेत्र में टेक्नोलॉजी और डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित करने वाले संगठन

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