Ayodhya Ram Mandir दान विवाद के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, SIT जांच में कई बड़ी खामियां उजागर
Ayodhya Ram Mandir News: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान गिनती से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने अब मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेष जांच दल (SIT) की जांच में सामने आई शुरुआती जानकारियों के बाद मंदिर प्रशासन पूरी दान प्रबंधन प्रणाली की समीक्षा कर रहा है। जांच के बाद अब दान की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से मजबूत और जवाबदेह बनाने की दिशा में नए नियम तैयार किए जा रहे हैं।
Ayodhya Ram Mandir News के अनुसार जून के पहले सप्ताह में दान गिनती प्रक्रिया के दौरान कथित गड़बड़ियों की सूचना मिलने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। जांच के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने दान गिनती से जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया और उनसे पूछताछ शुरू की। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों के पास से नकदी, सोने के आभूषण और कथित तौर पर अवैध धन से खरीदी गई एक कार भी बरामद की गई है। साथ ही कुछ रकम विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाने की भी जांच की जा रही है।
SIT की प्रारंभिक जांच में दान गिनती प्रक्रिया से जुड़े कई प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच में पाया गया कि दान गिनने वाले कर्मचारियों की नियमित अंतराल पर अदला-बदली नहीं की गई थी। इसके अलावा सुरक्षा जांच की प्रक्रिया भी अपेक्षित स्तर पर प्रभावी नहीं थी। अधिकारियों का मानना है कि संवेदनशील कार्यों में समय-समय पर कर्मचारियों का रोटेशन और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दान गिनती की पूरी प्रक्रिया की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाए जाने की आवश्यकता है। प्रारंभिक रिपोर्ट में तकनीकी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण और सुरक्षा मानकों को लेकर सुधार की जरूरत बताई गई है। इन्हीं कारणों से अब मंदिर प्रशासन दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में अपनाई जाने वाली सुरक्षा व्यवस्था का अध्ययन कर उसे अयोध्या में लागू करने की तैयारी कर रहा है।
देश के कई प्रमुख मंदिरों, जैसे तिरुपति बालाजी, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और मीनाक्षी अम्मन मंदिर में दान प्रबंधन के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू है। वहां दान पेटियां खोलने से लेकर नकदी की गिनती तक हर चरण में सीसीटीवी निगरानी, सीमित प्रवेश, बहु-अधिकारी सत्यापन, नियमित सुरक्षा जांच और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। इसी तरह की व्यवस्था को अयोध्या में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना न्यूनतम हो सके।
जांच के दौरान VIP दर्शन पास जारी करने की प्रक्रिया को लेकर भी कथित अनियमितताओं की बात सामने आई है। आरोप है कि कुछ लोगों ने डिजिटल पहचान संबंधी सुविधाओं का दुरुपयोग कर फर्जी VIP पास तैयार किए और उससे आर्थिक लाभ अर्जित किया। इस पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है और संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड की समीक्षा जारी है।
पूरे घटनाक्रम के बाद मंदिर प्रशासन में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जबकि अनिल मिश्रा ने भी जिम्मेदारी छोड़ दी। प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पूर्व भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए प्रशासनिक नेतृत्व के सामने अब पारदर्शी और अधिक सुरक्षित व्यवस्था लागू करने की बड़ी चुनौती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और दान की मात्रा को देखते हुए आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था आवश्यक हो गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सीसीटीवी, डिजिटल एक्सेस कंट्रोल, बायोमेट्रिक सत्यापन, नियमित ऑडिट और स्वतंत्र निगरानी प्रणाली जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में पारदर्शिता को और मजबूत बना सकती हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और कई पहलुओं की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं मंदिर प्रशासन दान प्रबंधन प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में कार्य कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मंदिर की प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों मजबूत बने रहें।

