Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, 1 की मौत; कई छात्र मलबे में फंसे

Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में भरभराकर गिरी 5 मंजिला इमारत, 1 की मौत; कई छात्र मलबे में फंसे

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे से हड़कंप मच गया। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद बड़ी संख्या में लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, NDRF और अन्य राहत-बचाव एजेंसियों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका इस्तेमाल Boys PG के तौर पर किया जा रहा था। इस वजह से आशंका जताई गई कि इमारत के अंदर बड़ी संख्या में छात्र मौजूद हो सकते थे। घटनास्थल दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक है और सत्य निकेतन का यह इलाका बड़ी संख्या में PG, हॉस्टल और खाने-पीने की दुकानों के लिए जाना जाता है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, रविवार दोपहर करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके बाद फायर सर्विस की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। NDRF की टीम ने भी मोर्चा संभाला और मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की। राहत-बचाव अभियान में डॉग स्क्वॉड की भी मदद ली जा रही है ताकि मलबे के नीचे मौजूद लोगों का पता लगाया जा सके।

हादसे में एक व्यक्ति की मौत, तीन गंभीर

ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, इस हादसे में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि तीन लोगों को गंभीर हालत में बाहर निकाला गया है। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। हालांकि, मलबे के नीचे अभी भी कई लोगों के फंसे होने की आशंका है और रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

शुरुआती रिपोर्टों में कई छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी। कुछ रिपोर्टों में 40 से 50 छात्रों के अंदर मौजूद होने की पुलिस की आशंका का भी जिक्र किया गया है, हालांकि फंसे लोगों की अंतिम संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में रेस्क्यू एजेंसियां बेहद सावधानी से मलबा हटाकर लोगों की तलाश कर रही हैं।

बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य

हादसे को लेकर सामने आई शुरुआती जानकारी में एक अहम बात सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। इसी दौरान बिल्डिंग के ढहने की घटना हुई। हालांकि, इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी।

इमारत के अचानक गिरने के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग भी मौके पर जमा हो गए। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर आसपास की एक इमारत को भी खाली करा दिया है, ताकि किसी और तरह का खतरा न रहे।

NDRF और डॉग स्क्वॉड की मदद से तलाश

रेस्क्यू ऑपरेशन में NDRF की विशेषज्ञ टीम के साथ डॉग स्क्वॉड को भी लगाया गया है। मलबे में फंसे लोगों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित कुत्तों की मदद ली जा रही है। भारी मलबे के कारण बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, NDRF, MCD, दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी और सिविल डिफेंस समेत कई एजेंसियां राहत-बचाव अभियान में शामिल हैं। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

सत्य निकेतन दिल्ली के उन इलाकों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इसलिए बिल्डिंग गिरने की खबर सामने आते ही छात्रों और उनके परिवारों में चिंता बढ़ गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने की आवाज बेहद तेज थी और कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मलबे से लोगों के बचाव की कोशिशें तुरंत शुरू कर दी गईं।

फिलहाल प्रशासन की ओर से लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की गई है, ताकि बचाव अभियान में किसी तरह की बाधा न आए। अधिकारी मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

हादसे की जांच के बाद सामने आएगी असली वजह

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की असली वजह अभी स्पष्ट नहीं है। बेसमेंट में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर जांच के दौरान कई पहलुओं की पड़ताल की जा सकती है। इसमें इमारत की संरचनात्मक मजबूती, निर्माण कार्य की स्थिति और सुरक्षा मानकों जैसे पहलू शामिल हो सकते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती मलबे के नीचे फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। बचाव दल लगातार काम कर रहे हैं और हर संभव तरीके से जिंदगी बचाने की कोशिश की जा रही है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ यह हादसा एक बार फिर घनी आबादी वाले इलाकों में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण कार्य के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर सवाल खड़े करता है। हालांकि, हादसे की जिम्मेदारी और कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच का इंतजार करना जरूरी है।

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