ट्रंप का नया टैरिफ बम, भारत-चीन समेत 60 देशों पर अमेरिका ने लगाए नए आयात शुल्क
Trump Tariffs: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी संरक्षणवादी व्यापार नीति को आगे बढ़ाते हुए भारत, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा, मैक्सिको, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया समेत 60 से अधिक देशों के खिलाफ नए आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने का ऐलान किया है। ट्रंप प्रशासन का यह फैसला वैश्विक व्यापार जगत में नई हलचल पैदा कर सकता है। माना जा रहा है कि इन नए टैरिफ का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निर्यात-आयात और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
Trump Tariffs के तहत लागू किए गए नए आयात शुल्क उस अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक आयात शुल्क की जगह लेंगे, जिसकी अवधि शुक्रवार को समाप्त हो रही थी। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, संबंधित देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर अब 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक का नया आयात शुल्क लगाया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने बताया कि नए टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, अमेरिका को लंबे समय से ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ देशों से आयात होने वाले उत्पादों के निर्माण में जबरन मजदूरी (Forced Labour) का इस्तेमाल किया जाता है। इसी आधार पर इन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।
ग्रीर ने कहा कि अमेरिका पहले से ही जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर सख्त रुख अपनाता रहा है। अब ट्रंप प्रशासन चाहता है कि अमेरिका के व्यापारिक साझेदार भी श्रम मानकों और मानवाधिकारों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करें। उनका कहना है कि यह कदम केवल व्यापारिक हितों के लिए नहीं बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और नैतिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए भी जरूरी है।
गौरतलब है कि इससे पहले फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए कुछ पुराने टैरिफ को कानूनी आधार पर चुनौती मिलने के बाद अवैध करार दिया था। अदालत के फैसले के बाद प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी प्रावधानों का सहारा लेते हुए अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू किया था। अब उसकी अवधि समाप्त होने के बाद नया टैरिफ ढांचा लागू कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ सकता है जिनका अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक संबंध है। भारत, चीन और यूरोपीय संघ जैसे बड़े निर्यातक देशों के कई उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो सकते हैं। इससे निर्यात प्रतिस्पर्धा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
भारत के संदर्भ में देखें तो अमेरिका देश के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। ऐसे में यदि भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया जाता है तो इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, रसायन, टेक्सटाइल, कृषि उत्पाद और अन्य निर्यात क्षेत्रों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन-किन उत्पादों को नए टैरिफ दायरे में शामिल किया गया है।
चीन पहले से ही अमेरिका के साथ लंबे समय से व्यापारिक तनाव का सामना कर रहा है। ऐसे में नए टैरिफ दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और प्रभावित कर सकते हैं। वहीं यूरोपीय संघ, कनाडा, मैक्सिको, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों के लिए भी यह फैसला चिंता का विषय माना जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रभावित देश जवाबी टैरिफ लागू करते हैं तो वैश्विक व्यापार युद्ध जैसी स्थिति दोबारा पैदा हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला, निवेश, उत्पादन लागत और उपभोक्ता कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। कई देशों की सरकारें इस फैसले का अध्ययन कर रही हैं और आने वाले दिनों में अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दे सकती हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार विश्लेषकों के अनुसार, यह फैसला केवल व्यापार तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर कूटनीतिक संबंधों और द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं पर भी पड़ सकता है। आने वाले समय में अमेरिका और प्रभावित देशों के बीच नए व्यापार समझौतों या वार्ताओं में इस मुद्दे की अहम भूमिका रहने की संभावना है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि प्रभावित देश अमेरिका के इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या वे जवाबी कदम उठाते हैं। यदि ऐसा होता है तो आने वाले महीनों में वैश्विक व्यापारिक माहौल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

