Jharkhand News: सचिवालय सेवा के अधिकारियों की Seniority List में संशोधन, 7 दिनों में मांगी गई आपत्ति
Jharkhand News: सचिवालय सेवा के अधिकारियों की Seniority List में संशोधन, 7 दिनों में मांगी गई आपत्ति
झारखंड में सचिवालय सेवा से जुड़े अधिकारियों के लिए एक अहम प्रशासनिक खबर सामने आई है। बिहार से झारखंड आए सचिवालय सेवा के अधिकारियों की वरीयता सूची में संशोधन किया गया है। संशोधित सूची को लेकर संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के अंदर आपत्तियां मांगी गई हैं। यदि किसी अधिकारी को सूची में दर्ज अपने नाम, पद या वरीयता क्रम को लेकर कोई परेशानी है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बिहार और झारखंड के अलग होने के बाद सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का बंटवारा किया गया था। इसके बाद विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों की सेवा से जुड़ी जानकारी और उनकी वरीयता निर्धारित करना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा रहा है।
इसी क्रम में बिहार से झारखंड आए सचिवालय सेवा के अधिकारियों की वरीयता सूची में संशोधन किया गया है। अब संशोधित सूची को लेकर संबंधित अधिकारियों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है।
क्या होती है वरीयता सूची?
वरीयता सूची को अंग्रेजी में Seniority List कहा जाता है। इसमें अधिकारियों की सेवा संबंधी स्थिति और विभाग में उनका वरीयता क्रम निर्धारित होता है।
यह सूची प्रशासनिक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण होती है। वरीयता क्रम का प्रभाव पदोन्नति और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है। इसलिए सूची में दर्ज नाम, पद और अन्य संबंधित जानकारियों का सही होना जरूरी है।
अधिकारियों को सात दिनों का समय
संशोधित वरीयता सूची जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों से सात दिनों के भीतर आपत्ति मांगी गई है। इस अवधि में अधिकारी सूची की जांच कर सकते हैं और किसी तरह की त्रुटि मिलने पर अपनी आपत्ति संबंधित विभाग के समक्ष रख सकते हैं।
यदि किसी अधिकारी को लगता है कि उसका वरीयता क्रम सही नहीं है या सूची में उसकी सेवा संबंधी जानकारी में कोई गलती है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है।
आगे क्या होगी प्रक्रिया?
अब विभाग की ओर से प्राप्त होने वाली आपत्तियों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हैं, तो संबंधित जानकारी की जांच के बाद विभागीय नियमों के अनुसार निर्णय लिया जा सकता है।
हालांकि, कितने अधिकारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है और संशोधित सूची में आगे कोई बदलाव होगा या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
प्रशासनिक प्रक्रिया पर नजर
फिलहाल, संशोधित वरीयता सूची के बाद संबंधित अधिकारियों को अपनी बात रखने का अवसर मिला है। सात दिनों की निर्धारित अवधि में दर्ज होने वाली आपत्तियों और उन पर विभाग के निर्णय के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
झारखंड सचिवालय सेवा से जुड़े इस मामले में अब संबंधित अधिकारियों और विभागीय प्रक्रिया के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।

