KGMU Conversion Case: आगरा और एटा तक पहुंची जांच, 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के नेटवर्क की पड़ताल में STF

KGMU Conversion Case: आगरा और एटा तक पहुंची जांच, 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के कथित नेटवर्क की पड़ताल में STF

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में सामने आए कथित धर्मांतरण मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अब इस मामले के तार आगरा और एटा के मेडिकल कॉलेजों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। एसटीएफ यानी स्पेशल टास्क फोर्स 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं से जुड़े बताए जा रहे कथित नेटवर्क की जांच कर रही है। जांच में जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाने, महिला डॉक्टरों को प्रभावित करने और मेडिकल छात्रों को बैठकों के माध्यम से जोड़ने जैसे आरोपों की पड़ताल की जा रही है।

KGMU से आगरा और एटा तक पहुंची जांच

केजीएमयू में सामने आए कथित धर्मांतरण मामले में जांच एजेंसियों का दायरा अब लखनऊ से बाहर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एसटीएफ आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज और एटा मेडिकल कॉलेज से जुड़े डॉक्टरों तथा छात्रों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि अलग-अलग मेडिकल संस्थानों में काम करने वाले लोगों के बीच किस तरह का संपर्क था और क्या इन संपर्कों के जरिए कोई संगठित गतिविधि संचालित की जा रही थी।

इस मामले में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी समेत कई लोगों के आपसी संपर्कों की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।

जकात के नाम पर हर महीने 10 लाख रुपये जुटाने का आरोप

इस मामले में आर्थिक लेनदेन भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। आरोप है कि जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाए जाते थे।

एसटीएफ इस कथित फंडिंग नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किन लोगों से एकत्र की जाती थी, किन खातों में जमा होती थी और उसका इस्तेमाल किन गतिविधियों के लिए किया जाता था।

इसके लिए संदिग्ध बैंक खातों, लेनदेन और आरोपितों के आपसी आर्थिक संपर्कों की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, रकम के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

डॉ. रिजवान मलिक की एटा मेडिकल कॉलेज में तैनाती की भी जांच

जांच में डॉ. रिजवान मलिक का नाम भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि वह एटा मेडिकल कॉलेज में करीब पांच साल तक तैनात रहा था।

इसके अलावा अक्टूबर 2023 में उसके खिलाफ एक असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ करने के आरोप में मुकदमा दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है।

एसटीएफ अब उसके पुराने संपर्कों, मेडिकल कॉलेज में तैनाती के दौरान की गतिविधियों और अन्य संबंधित लोगों से उसके संबंधों की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि एटा और लखनऊ के बीच कथित नेटवर्क का कोई संबंध था या नहीं।

इस्लामिक मेडिकोज समूह का नाम भी आया सामने

जांच के दौरान इस्लामिक मेडिकोज नाम के एक समूह का भी जिक्र सामने आया है। आरोप है कि इस समूह के माध्यम से पुस्तकों और पत्रिकाओं के जरिए मेडिकल कॉलेजों के पुराने और नए छात्रों को जोड़ने की कोशिश की जाती थी।

जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस समूह की वास्तविक गतिविधियां क्या थीं और इससे जुड़े लोगों की भूमिका किस तरह की थी।

इसके अलावा केजीएमयू के हॉस्टलों में बाहरी मौलानाओं की तकरीरें आयोजित किए जाने और जकात के नाम पर चंदा एकत्र करने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

एसटीएफ इन आरोपों से जुड़े लोगों, बैठकों और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल इन गतिविधियों के उद्देश्य और कथित नेटवर्क से उनके संबंधों को लेकर जांच जारी है।

महिला डॉक्टरों को प्रभावित करने के लिए रणनीति बनाने का आरोप

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू महिला डॉक्टरों को कथित तौर पर प्रभावित करने से जुड़ा है। आरोप है कि इसके लिए विशेष रणनीति और स्क्रिप्ट तैयार की जाती थी।

एसटीएफ इस बात की जांच कर रही है कि क्या वास्तव में महिला डॉक्टरों को प्रभावित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा था। इसके साथ ही दीनी तालीम के नाम पर बंद कमरों में बैठकें आयोजित किए जाने के आरोपों की भी पड़ताल हो रही है।

जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि इन बैठकों में कौन-कौन लोग शामिल होते थे, उनका उद्देश्य क्या था और क्या उनका किसी कथित नेटवर्क से संबंध था।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। इसलिए जांच पूरी होने तक इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

डॉ. रमीज के माता-पिता भी आरोपित

मामले में जांच का दायरा डॉ. रमीज के परिवार तक भी पहुंच गया है। जानकारी के मुताबिक, उनके पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी मामले में आरोपित बनाया गया है।

जांच एजेंसियां परिवार के सदस्यों से जुड़े आर्थिक लेनदेन और अन्य आरोपितों के साथ उनके संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं।

बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित नेटवर्क को आर्थिक सहायता कहां से मिलती थी और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका थी।

STF की जांच में अब किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं?

KGMU के कथित धर्मांतरण मामले में जांच एजेंसी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। इनमें कथित नेटवर्क का वास्तविक स्वरूप, डॉक्टरों और मौलानाओं के बीच संपर्क, जकात के नाम पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल और मेडिकल छात्रों को जोड़ने की गतिविधियां शामिल हैं।

इसके अलावा आगरा और एटा के मेडिकल कॉलेजों से जुड़े लोगों की भूमिका तथा महिला डॉक्टरों को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।

फिलहाल एसटीएफ बैंक खातों, संपर्कों और अन्य उपलब्ध जानकारियों के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

लखनऊ के केजीएमयू से शुरू हुआ यह मामला अब आगरा और एटा तक पहुंच गया है। 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के कथित नेटवर्क, फंडिंग और मेडिकल संस्थानों में संपर्कों की जांच ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

हालांकि, अभी सामने आए कई आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच एजेंसी की अंतिम रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन लोगों की वास्तविक भूमिका थी।

फिलहाल एसटीएफ की जांच जारी है और पूरे मामले पर लोगों की नजर बनी हुई है।

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