कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक: गोलगो गांव में आधा दर्जन घर तोड़े, रातभर दहशत में रहे ग्रामीण
कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक: गोलगो गांव में मचाया उत्पात, कई घर क्षतिग्रस्त
कोडरमा में जंगली हाथियों का आतंक एक बार फिर ग्रामीणों के लिए बड़ी परेशानी बनकर सामने आया है। जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र अंतर्गत गोलगो गांव में बीती रात हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों के अचानक गांव में घुस आने से ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवारों को रातभर जागकर अपनी सुरक्षा करनी पड़ी। इस घटना में आधा दर्जन से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई परिवारों का अनाज और घरेलू सामान भी बर्बाद हो गया।
ग्रामीणों के अनुसार देर रात जंगल की ओर से हाथियों का एक बड़ा झुंड गांव की सीमा में प्रवेश कर गया। शुरुआत में लोगों को हाथियों की आहट सुनाई दी, लेकिन जब तक वे कुछ समझ पाते, तब तक हाथी गांव के कई हिस्सों में पहुंच चुके थे। हाथियों ने रास्ते में आने वाले घरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया और कई मकानों की दीवारें तथा दरवाजे तोड़ दिए।
कई घरों को पहुंचाया भारी नुकसान
हाथियों के झुंड ने गांव के आधा दर्जन से अधिक घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया। कुछ घरों की मिट्टी की दीवारें पूरी तरह ढह गईं, जबकि कई पक्के मकानों के दरवाजे और खिड़कियां टूट गईं। घरों में रखे अनाज और खाद्य सामग्री को भी हाथियों ने नुकसान पहुंचाया। कई परिवारों की महीनों की जमा पूंजी एक ही रात में बर्बाद हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथी भोजन की तलाश में गांवों की ओर रुख कर रहे हैं। खेतों और घरों में रखे अनाज की गंध उन्हें बस्तियों तक खींच लाती है, जिसके कारण ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
जान बचाने के लिए घर छोड़कर भागे लोग
हाथियों के गांव में घुसने की सूचना मिलते ही पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लोग अपने परिवारों को लेकर घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। कई ग्रामीणों ने पूरी रात खुले स्थानों या पड़ोसी गांवों में बिताई।
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी के दौरान किसी भी प्रकार की आवाज या विरोध करना खतरनाक हो सकता था। ऐसे में लोगों ने अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। सौभाग्य से इस घटना में किसी के घायल होने या जानमाल की बड़ी क्षति की सूचना नहीं है, लेकिन लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।
लगातार बढ़ रही है हाथियों की आवाजाही
गोलगो गांव और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही पिछले कुछ वर्षों में बढ़ी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में भोजन और प्राकृतिक संसाधनों की कमी के कारण हाथी अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर अधिक आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार हाथियों के झुंड ने फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचाया है। हर बार वन विभाग को सूचना दी जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त घरों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से बातचीत कर नुकसान का आकलन शुरू किया। विभाग की ओर से कहा गया है कि नियमानुसार प्रभावित लोगों को सहायता और मुआवजा देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे हाथियों के झुंड के करीब जाने की कोशिश न करें और किसी भी गतिविधि की तुरंत सूचना विभाग को दें। अधिकारियों ने यह भी कहा कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों ने की मुआवजे और सुरक्षा की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि हाथियों के आतंक से स्थायी राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही जिन परिवारों के घर और सामान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल हाथियों के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और भी बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।
बढ़ रही चिंता
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने कोडरमा जिले के ग्रामीण इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। लोग रात में भय के साये में जीने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए जंगलों के संरक्षण, हाथियों के सुरक्षित कॉरिडोर और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक योजनाओं की आवश्यकता है।

