RIMS Ranchi News: रिम्स को अपनी नियमावली खुद बनानी चाहिए, एनसीएसटी सदस्य डॉ. आशा लकड़ा के निर्देश

RIMS Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची स्थित राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। रिम्स में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से कहा कि चूंकि रिम्स एक स्वायत्त संस्था है, इसलिए उसे हर छोटे-बड़े प्रशासनिक निर्णय के लिए राज्य सरकार पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है। संस्थान को अपनी स्वतंत्र नियमावली तैयार कर प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना चाहिए।

समीक्षा बैठक के दौरान डॉ. आशा लकड़ा ने कहा कि किसी भी स्वायत्त संस्थान का उद्देश्य यही होता है कि वहां प्रशासनिक फैसले तेजी से लिए जा सकें और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने कहा कि यदि हर निर्णय के लिए सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जाएगा तो संस्थान की कार्यक्षमता प्रभावित होगी। इसलिए रिम्स प्रबंधन को जल्द से जल्द अपनी नियमावली तैयार कर उसे लागू करने की दिशा में काम करना चाहिए।

बैठक में अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था, चिकित्सकों की नियुक्ति, पदोन्नति और बैकलॉग भर्ती सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. आशा लकड़ा ने डॉक्टरों, प्रोफेसरों, जूनियर डॉक्टरों और एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए अलग-अलग रोस्टर तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि भर्ती और पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए तथा सभी रोस्टर को ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाए ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

उन्होंने अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित 26 प्रतिशत आरक्षण का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नियुक्तियों और पदोन्नति में आरक्षण संबंधी सभी नियमों का सख्ती से पालन किया जाए और किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। साथ ही उन्होंने बैकलॉग रिक्तियों को जल्द भरने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।

रिम्स की आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से डॉ. आशा लकड़ा ने ग्रिवांस रिड्रेसल सेल (शिकायत निवारण प्रकोष्ठ) और स्थायी समिति गठित करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और मरीजों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान होना चाहिए। इसके लिए एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए ताकि किसी भी शिकायत का शीघ्र और निष्पक्ष निपटारा किया जा सके।

उन्होंने लायजन अधिकारियों के नियमित प्रशिक्षण पर भी विशेष बल दिया। उनके अनुसार आरक्षण नीति, सेवा नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की सही जानकारी अधिकारियों को होना आवश्यक है। इससे संस्थान की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी बनेगी तथा कर्मचारियों को भी बेहतर प्रशासनिक सहयोग मिलेगा।

मरीजों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डॉ. आशा लकड़ा ने ओपीडी परिसर में हिंदी भाषा में स्पष्ट डिस्प्ले बोर्ड लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल आने वाले अधिकांश मरीज स्थानीय भाषा और हिंदी को आसानी से समझते हैं। इसलिए सभी महत्वपूर्ण सूचनाएं हिंदी में भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इसके अलावा विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, ओपीडी समय और संबंधित विभागों की जानकारी पहले से सार्वजनिक करने की भी सलाह दी गई, ताकि मरीजों और उनके परिजनों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने रिम्स की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की। साथ ही सुरक्षा कर्मियों और नई नियुक्त नर्सों के नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ अस्पताल कर्मियों का व्यवहार, सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

डॉ. आशा लकड़ा ने निर्देश दिया कि अस्पताल की आंतरिक शिकायतों की समीक्षा प्रत्येक तीन महीने में की जाए, जबकि निदेशक स्तर पर हर छह महीने में विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। इन बैठकों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं, भर्ती, रोस्टर, आरक्षण व्यवस्था और मरीजों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

उन्होंने कहा कि रिम्स केवल झारखंड ही नहीं बल्कि आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भी एक प्रमुख चिकित्सा संस्थान है। ऐसे में यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता लगातार बेहतर होना जरूरी है। यदि प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी तो डॉक्टरों और कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण मिलेगा तथा मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराया जा सकेगा।

बैठक के अंत में रिम्स प्रबंधन ने आयोग के सुझावों और निर्देशों को गंभीरता से लागू करने का भरोसा दिलाया। उम्मीद की जा रही है कि इन सुधारात्मक कदमों से आने वाले समय में रिम्स की कार्यप्रणाली और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा मरीजों के अनुकूल बन सकेगी।

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