Tamil Nadu Politics: भाजपा के खिलाफ साथ आएंगे CM विजय और DMK? जानिए क्या है ‘स्प्लिट अलायंस’ की पूरी चर्चा
Tamil Nadu Politics: क्या भाजपा के खिलाफ साथ आएंगे विजय और डीएमके?
Tamil Nadu Politics में इन दिनों एक नई राजनीतिक चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) और सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के बीच संभावित ‘स्प्लिट अलायंस’ को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। यह चर्चा ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य की राजनीति में विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों आगामी चुनावों की रणनीति तैयार करने में जुटे हैं।
हालांकि, डीएमके ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि उसकी पार्टी टीवीके के साथ किसी भी तरह का राजनीतिक गठबंधन करने की इच्छुक नहीं है। इसके बावजूद ‘स्प्लिट अलायंस’ का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्या है ‘स्प्लिट अलायंस’ का मॉडल?
‘स्प्लिट अलायंस’ ऐसा राजनीतिक मॉडल माना जाता है, जिसमें दो दल राज्य स्तर पर एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बने रहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर किसी तीसरी पार्टी को रोकने या किसी बड़े राजनीतिक लक्ष्य के लिए साथ आ सकते हैं।
दरअसल, इस मॉडल का उद्देश्य अलग-अलग चुनावों में अलग रणनीति अपनाना होता है। राज्य की राजनीति में प्रतिस्पर्धा जारी रहती है, जबकि लोकसभा जैसे राष्ट्रीय चुनावों में साझा रणनीति बनाई जा सकती है।
इसी अवधारणा को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा तेज हुई है और इसे भाजपा के खिलाफ संभावित रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
वीसीके प्रमुख ने दिया साथ आने का सुझाव
विदुथलाई चिरुथिगल काची (VCK) के प्रमुख थोल थिरुमावलवन ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भाजपा और सांप्रदायिक राजनीति का मुकाबला करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर डीएमके और टीवीके को साथ आने पर विचार करना चाहिए।
उनका मानना है कि यदि राज्य स्तर पर दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ें और राष्ट्रीय स्तर पर किसी साझा उद्देश्य के लिए एकजुट हों, तो इससे विपक्षी दलों को मजबूती मिल सकती है।
इसके अलावा, उन्होंने कहा कि बदलते राजनीतिक माहौल में नए तरह के गठबंधन मॉडल पर विचार करना समय की जरूरत है।
डीएमके ने क्यों किया साफ इनकार?
वीसीके प्रमुख के सुझाव के बाद डीएमके ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया। डीएमके सांसद गणपति राजकुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तमिलनाडु में ‘स्प्लिट अलायंस’ का मॉडल व्यवहारिक नहीं है।
उन्होंने कहा कि टीवीके ने सार्वजनिक रूप से डीएमके को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी घोषित किया है। ऐसे में दोनों दलों के बीच किसी भी प्रकार के गठबंधन की संभावना फिलहाल नहीं दिखाई देती।
वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके अपनी वर्तमान राजनीतिक रणनीति पर ही आगे बढ़ेगी और किसी नए गठबंधन की आवश्यकता नहीं है।
सहयोगी दलों को लेकर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद के बीच थोल थिरुमावलवन ने डीएमके की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके अपने सहयोगी दलों को पर्याप्त सम्मान और सत्ता में उचित हिस्सेदारी नहीं देती।
उनका कहना था कि यदि गठबंधन में शामिल दलों को बराबरी का सम्मान और जिम्मेदारी मिलती, तो चुनावी नतीजे अलग हो सकते थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सहयोगी दलों की अनदेखी का असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा है।
हालांकि, डीएमके की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
तमिलनाडु की राजनीति पर क्या पड़ सकता है असर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल डीएमके और टीवीके के बीच गठबंधन की संभावना बेहद कम दिखाई देती है। दोनों दल राज्य की राजनीति में खुद को एक-दूसरे का मजबूत विकल्प बताने की कोशिश कर रहे हैं।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों के बीच भाजपा के खिलाफ व्यापक रणनीति को लेकर चर्चा जारी रह सकती है। आने वाले समय में लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में डीएमके ने टीवीके के साथ किसी भी संभावित गठबंधन की संभावना से साफ इनकार कर दिया है।
क्या आगे बदल सकते हैं राजनीतिक समीकरण?
भारतीय राजनीति में चुनावों से पहले गठबंधन और रणनीतियां बदलना कोई नई बात नहीं है। कई बार चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार दल अपने रुख में बदलाव करते हैं।
फिलहाल, तमिलनाडु में ‘स्प्लिट अलायंस’ केवल राजनीतिक चर्चा का विषय बना हुआ है। डीएमके ने स्पष्ट कर दिया है कि वह टीवीके के साथ गठबंधन नहीं करेगी। वहीं, वीसीके प्रमुख अब भी विपक्षी दलों की व्यापक एकजुटता की वकालत कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति में ‘स्प्लिट अलायंस’ को लेकर बहस जरूर तेज हुई है, लेकिन मौजूदा हालात में डीएमके और टीवीके के साथ आने की संभावना बेहद कम नजर आती है। आने वाले महीनों में राजनीतिक घटनाक्रम इस चर्चा को नई दिशा दे सकते हैं।

