बांकीपुर उपचुनाव की मतगणना शुरू, भाजपा का गढ़ बचेगा या चलेगा प्रशांत किशोर का जादू?

बिहार की राजनीति में आज का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है। राजधानी पटना स्थित एएन कॉलेज मतगणना केंद्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच सुबह 8 बजे सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू हुई, जिसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज मतों की गणना का काम शुरू किया गया। पूरे बिहार की नजर इस सीट के नतीजों पर टिकी हुई है, क्योंकि यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट का परिणाम नहीं बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा का संकेत भी माना जा रहा है।

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 1995 से लगातार भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज करती रही है। ऐसे में इस बार का उपचुनाव भाजपा के लिए अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने की बड़ी चुनौती बन गया है। दूसरी ओर जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार सीधे चुनावी मैदान में उतरकर इस सीट को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुके हैं। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है।

इस उपचुनाव की आवश्यकता तब पड़ी जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हो गई। इसके बाद चुनाव आयोग ने 30 जुलाई को यहां उपचुनाव कराया। भाजपा ने इस बार नीरज सिन्हा को उम्मीदवार बनाया, जबकि जन सुराज की ओर से स्वयं प्रशांत किशोर मैदान में उतरे। राजद ने रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को और रोचक बना दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि बिहार की पारंपरिक राजनीति और नई राजनीतिक सोच के बीच भी एक तरह की परीक्षा है। भाजपा जहां अपने तीन दशक पुराने वोट बैंक और संगठनात्मक ताकत के भरोसे मैदान में है, वहीं प्रशांत किशोर विकास, शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों के मुद्दों को लेकर जनता के बीच पहुंचे हैं।

मतगणना के लिए कुल 15 टेबल लगाए गए हैं। इनमें 14 टेबल पर वोटों की गिनती की जा रही है, जबकि एक टेबल प्रशासनिक कार्यों के लिए आरक्षित है। अधिकारियों के अनुसार कुल 422 मतदान केंद्रों के मतों की गणना पूरी होने में लगभग 6 घंटे 35 मिनट का समय लग सकता है। ऐसे में दोपहर तक स्पष्ट परिणाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

इस चुनाव की एक और महत्वपूर्ण बात मतदान प्रतिशत रहा। बांकीपुर सीट पर इस बार केवल 34.3 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो सामान्य विधानसभा चुनावों की तुलना में काफी कम माना जा रहा है। कम मतदान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि उसका पारंपरिक वोट बैंक मतदान के लिए बाहर निकला है, जबकि जन सुराज का दावा है कि बदलाव चाहने वाले मतदाताओं ने बड़ी संख्या में वोट डाले हैं। राजद भी सामाजिक समीकरणों के आधार पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जता रही है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कम मतदान का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है। कई बार कम मतदान वाले चुनावों में संगठित वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि भाजपा को अपने मजबूत संगठन पर भरोसा है। वहीं प्रशांत किशोर की टीम का दावा है कि युवाओं और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं का समर्थन उन्हें मिल सकता है।

बांकीपुर सीट को लेकर राज्यभर में राजनीतिक चर्चा इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह चुनाव भविष्य की राजनीति का संकेत माना जा रहा है। यदि भाजपा यह सीट बरकरार रखती है तो यह उसके मजबूत संगठन और पारंपरिक समर्थन का प्रमाण होगा। वहीं यदि प्रशांत किशोर कोई बड़ा उलटफेर करने में सफल होते हैं तो बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जाएगी। राजद की जीत भी राज्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

बांकीपुर के अलावा आज मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों की मतगणना भी जारी है। हालांकि राष्ट्रीय मीडिया और राजनीतिक दलों का सबसे अधिक ध्यान बांकीपुर सीट पर ही केंद्रित है।

फिलहाल मतगणना जारी है और शुरुआती रुझान धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ेंगे, तस्वीर और स्पष्ट होती जाएगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भाजपा अपना तीन दशक पुराना किला बचा पाएगी या फिर प्रशांत किशोर बिहार की राजनीति में बड़ा राजनीतिक संदेश देने में सफल होंगे। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले का परिणाम आने वाले समय में बिहार की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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